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राहु काल: रोज़ का समय और क्या न करें
पंचांग

राहु काल: क्या है, रोज़ का समय कैसे निकलता है और इसमें क्या न करें

ZodiacReads · · 5 मिनट में पढ़ें

कोई नया काम शुरू करने से पहले बहुत से परिवारों में पूछा जाता है: “राहु काल तो नहीं चल रहा?” दक्षिण भारत में यह परंपरा खास तौर पर मज़बूत है, पर अब पूरे देश में लोग राहु काल देखते हैं। जानिए यह क्या है और रोज़ इसका समय कैसे निकलता है।

राहु काल क्या है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के दिन को आठ बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है। हर वार को इनमें से एक हिस्सा राहु का माना जाता है। यही हिस्सा राहु काल है। आमतौर पर यह लगभग डेढ़ घंटे का होता है, पर मौसम के साथ दिन छोटा-बड़ा होने पर यह भी थोड़ा घटता-बढ़ता है।

वार के हिसाब से राहु काल

नीचे दिया गया समय सुबह 6 बजे सूर्योदय और शाम 6 बजे सूर्यास्त मानकर है। आपके शहर में असली समय कुछ मिनट आगे-पीछे होगा।

वारदिन का हिस्सालगभग समय
सोमवारदूसरासुबह 7:30 से 9:00
मंगलवारसातवाँदोपहर 3:00 से 4:30
बुधवारपाँचवाँदोपहर 12:00 से 1:30
गुरुवारछठादोपहर 1:30 से 3:00
शुक्रवारचौथासुबह 10:30 से दोपहर 12:00
शनिवारतीसरासुबह 9:00 से 10:30
रविवारआठवाँशाम 4:30 से 6:00

अपने शहर का राहु काल कैसे निकालें?

मान लीजिए आज सोमवार है, सूर्योदय सुबह 6:20 पर और सूर्यास्त शाम 5:40 पर है।

  • दिन की लंबाई: 11 घंटे 20 मिनट, यानी 680 मिनट।
  • एक हिस्सा: 680 ÷ 8 = 85 मिनट।
  • सोमवार को दूसरा हिस्सा राहु काल है: 6:20 + 85 मिनट = 7:45 से 9:10 तक।

हर शहर का सूर्योदय अलग होता है, इसलिए दिल्ली और मुंबई का राहु काल भी अलग होता है। आज का सही समय पंचांग में देखना सबसे आसान है।

राहु काल में क्या न करें?

परंपरा के अनुसार राहु काल में नई शुरुआत टाली जाती है, जैसे:

  • नया व्यापार, दुकान या प्रोजेक्ट शुरू करना
  • गृह प्रवेश, सगाई या कोई शुभ संस्कार
  • नई गाड़ी, घर या कीमती सामान की ख़रीद
  • कोई ज़रूरी समझौता या कागज़ात पर हस्ताक्षर
  • किसी शुभ काम के लिए यात्रा की शुरुआत

राहु काल में क्या कर सकते हैं?

राहु काल में घर से निकलना या रोज़ का काम करना मना नहीं है। पहले से चल रहे काम, नौकरी, पढ़ाई और घर के काम सामान्य रूप से किए जा सकते हैं। इस समय पूजा, जप और ध्यान करना अच्छा माना जाता है। अगर कोई ज़रूरी काम राहु काल में ही करना पड़े, तो शुरू करने से पहले हनुमान जी या दुर्गा माँ का स्मरण करें।

यमगंड और गुलिक काल

राहु काल की तरह दिन के आठ हिस्सों में से एक हिस्सा यमगंड और एक गुलिक काल का होता है। यमगंड को भी नई शुरुआत के लिए टाला जाता है। ZodiacReads के पंचांग में तीनों का समय एक साथ दिखता है, साथ में शुभ कामों के लिए चौघड़िया और अभिजीत मुहूर्त भी।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

राहु काल कितनी देर का होता है?

दिन की लंबाई का आठवाँ हिस्सा, यानी आमतौर पर लगभग डेढ़ घंटा। गर्मियों में दिन लंबा होने से यह थोड़ा बढ़ जाता है और सर्दियों में थोड़ा घट जाता है।

क्या राहु काल हर शहर में एक ही समय पर होता है?

नहीं। राहु काल सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाला जाता है, जो हर शहर में अलग होते हैं। इसलिए अपने शहर का पंचांग देखें।

क्या राहु काल में यात्रा कर सकते हैं?

रोज़ की आवाजाही में कोई रोक नहीं है। परंपरा में सिर्फ़ किसी शुभ काम के लिए यात्रा की शुरुआत राहु काल में टाली जाती है।

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यह लेख वैदिक ज्योतिष की पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी बड़े फ़ैसले से पहले पूरी कुंडली देखें।