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कालसर्प दोष कैलकुलेटर
जन्म तिथि, समय और स्थान डालें और जानें कि राहु-केतु के बीच सारे ग्रह घिरे हैं या नहीं, आपका कालसर्प किस प्रकार का है और उसके उपाय क्या हैं।
कालसर्प दोष क्या है?
कालसर्प ("काल रूपी सर्प") तब बनता है जब राहु और केतु सातों ग्रहों को अपनी धुरी के एक ओर घेर लेते हैं। यह कर्म से जुड़ी तीव्रता और देरी लाता है, पर यह कालसर्प योग के रूप में भी फल दे सकता है, जिससे ख़ासकर 30 की उम्र के बाद असाधारण उन्नति और पहचान मिलती है।
पूर्ण और आंशिक
पूर्ण कालसर्प: सातों ग्रह धुरी के एक ओर। आंशिक (कालामृत): सिर्फ़ 1-2 ग्रह बाहर, जिससे असर हल्का होता है। बाकी हर स्थिति में कुंडली कालसर्प से मुक्त है।
क्या आप जानते हैं?
कालसर्प के 12 शास्त्रीय प्रकार हैं, जिनके नाम पौराणिक नागों पर रखे गए हैं। प्रकार इस बात से तय होता है कि लग्न से राहु किस भाव में है।
यहाँ सही जन्म समय ज़रूरी है, क्योंकि लग्न बदलने के साथ राहु-केतु के भाव भी बदल जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
कालसर्प दोष कैसे पता करें?
ऊपर अपनी जन्म तिथि, सही जन्म समय और स्थान डालें। कैलकुलेटर देखता है कि सूर्य से शनि तक सातों ग्रह राहु-केतु धुरी के एक ओर हैं या नहीं, और लग्न से राहु के भाव के आधार पर आपका कालसर्प प्रकार बताता है।
कालसर्प दोष के 12 प्रकार कौन से हैं?
अनंत, कुलिक, वासुकि, शंखपाल, पद्म, महापद्म, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर और शेषनाग। प्रकार इस बात पर निर्भर है कि राहु लग्न से पहले से बारहवें भाव में से किसमें है।
क्या कालसर्प दोष हमेशा बुरा होता है?
नहीं। कई कुंडलियों में यह कालसर्प योग की तरह भी काम करता है, जहाँ संघर्ष के बाद बड़ी सफलता और पहचान मिलती है। असर पूरी कुंडली, ग्रहों के बल और दशा पर भी निर्भर करता है।
कालसर्प दोष के उपाय क्या हैं?
भगवान शिव की पूजा और "ॐ नमः शिवाय" का जाप, महामृत्युंजय मंत्र, नाग पंचमी पर नाग पूजा, और त्र्यंबकेश्वर या कालहस्ती में कालसर्प निवारण पूजा सबसे प्रचलित उपाय हैं।