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मांगलिक दोष कैलकुलेटर
जन्म तिथि, समय और स्थान डालें और जानें कि आपकी कुंडली में मंगल दोष है या नहीं, कितना प्रबल है और क्या कोई दोष भंग योग बनता है।
मांगलिक दोष क्या है?
इसे मंगल दोष, कुज दोष, भौम दोष या अंगारक दोष भी कहते हैं। यह तब बनता है जब मंगल कुंडली के उन भावों में हो जो विवाह, घरेलू जीवन और जीवनसाथी से जुड़े हैं। वैदिक कुंडली मिलान में यह कई बातों में से एक है।
किन भावों से बनता है?
लग्न, चंद्र या शुक्र से इनमें से किसी भाव में मंगल हो तो:
क्या आप जानते हैं?
लोक मान्यता है कि 28 साल की उम्र के बाद मांगलिक असर कम हो जाता है, और दो मांगलिक लोगों के विवाह से दोष कट जाता है। पर शास्त्रों में ये बातें नहीं मिलतीं; वहाँ दोष भंग सिर्फ़ ग्रहों की स्थिति से तय होता है।
यहाँ सही जन्म समय ज़रूरी है, क्योंकि लग्न लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है।
दोष भंग के आम नियम
- मंगल अपनी राशि मेष या वृश्चिक में हो
- मंगल उच्च राशि मकर में हो
- मंगल की गुरु के साथ युति हो
- शनि की मंगल पर दृष्टि हो
- दोनों साथी मांगलिक हों (लोक मान्यता, शास्त्रीय नियम नहीं)
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मांगलिक दोष कैसे पता करें?
ऊपर अपनी जन्म तिथि, सही जन्म समय और जन्म स्थान डालें। कैलकुलेटर देखता है कि मंगल आपके लग्न, चंद्र और शुक्र से 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में है या नहीं, और इन तीनों में से कितनी जगह दोष बनता है।
क्या मांगलिक दोष खत्म हो सकता है?
शास्त्रों में कुछ स्थितियों में दोष भंग माना गया है: मंगल अपनी राशि (मेष, वृश्चिक) या उच्च राशि (मकर) में हो, गुरु के साथ युति हो, या शनि की दृष्टि हो। ऐसी स्थिति मिलने पर कैलकुलेटर दोष की तीव्रता घटाकर दिखाता है।
हल्का और प्रबल मांगलिक में क्या फ़र्क है?
अगर मंगल लग्न, चंद्र और शुक्र, तीनों से दोष वाले भाव में हो तो दोष प्रबल माना जाता है; दो से हो तो मध्यम और एक से हो तो हल्का।
क्या मांगलिक व्यक्ति की शादी गैर-मांगलिक से हो सकती है?
हाँ। मांगलिक दोष कुंडली मिलान की कई बातों में से सिर्फ़ एक है। विवाह से पहले पूरा गुण मिलान और किसी योग्य ज्योतिषी की सलाह लेना बेहतर है।